काशी संस्कृति संसद का 3 नवंबर से होगा आगाज: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भेजा शुभकामना संदेश,मनुस्मृति की म...
धर्म और आध्यात्मिकता की नगरी काशी में 3 से 5 नवंबर तक संस्कृति संसद 2026 का आयोजन होगा। सिगरा स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में होने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन में देशभर के संत, विद्वान, सामाजिक चिंतक और युवा शामिल होंगे। इस बार संस्कृति संस
आयोजन में शामिल होने के लिए देशभर के संत सोमवार शाम काशी पहुंचेंगे। सोमवार को प्रदोष काल में बाबा विश्वनाथ का सहस्त्रार्चन और रुद्राभिषेक किया जाएगा। इसमें संत समाज के प्रतिनिधि मुख्य यजमान होंगे।
प्रधानमंत्री ने भेजा पत्र।
PM मोदी ने भेजा शुभकामना संदेश
संस्कृति संसद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभकामना संदेश भेजा है। उन्होंने भारतीय संत समाज, गंगा महासभा और अखाड़ा परिषद सहित आयोजन से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं दी हैं।
अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी सदियों से भारत की आध्यात्मिक चेतना और ज्ञान परंपरा का प्रमुख केंद्र रही है। बाबा विश्वनाथ की नगरी होने के साथ यह सारनाथ में भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश की भूमि और जैन तीर्थंकरों की जन्मस्थली के रूप में भी विशेष महत्व रखती है। आदि शंकराचार्य की ज्ञान साधना से भी काशी का गहरा संबंध रहा है। यहां शास्त्रार्थ, संवाद और चिंतन की परंपरा ने विभिन्न विचारों को नई दिशा दी है।
गंगा की निर्मलता और विरासत संरक्षण पर चर्चा
संस्कृति संसद में इस बार राष्ट्रीय गंगा विमर्श विशेष आकर्षण रहेगा। इसमें नमामि गंगे अभियान के तहत सीवेज शोधन संयंत्रों के निर्माण, औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण, जैव विविधता के संरक्षण और जनभागीदारी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
PM मोदी ने अपने संदेश में काशी विश्वनाथ धाम के पुनर्विकास, मां गंगा की स्वच्छता, घाटों के सौंदर्यीकरण, सारनाथ की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और बनारसी हस्तशिल्प को नए अवसरों से जोड़ने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
युवाओं के लिए अलग सभागार, खुद रखेंगे सवाल
इस बार संस्कृति संसद में युवाओं की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है। उनके लिए अलग सभागार और सत्र तैयार किया गया है। इसमें युवा केवल श्रोता नहीं होंगे, बल्कि वक्ता और संचालक की भूमिका भी निभाएंगे। उनके मन में उठने वाले सवालों पर संवाद होगा और समाधान तलाशने का प्रयास किया जाएगा।
आयोजकों के मुताबिक, युवाओं को केवल भाषण सुनने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें विचार-विमर्श की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिलेगा।
मनुस्मृति की मूल पांडुलिपियों पर भी मंथन
संस्कृति संसद में मनुस्मृति की मूल पांडुलिपियों और उनके ऐतिहासिक संदर्भों पर भी चर्चा होगी। इसमें पांडुलिपियों की उपलब्धता और उनके विदेशों तक पहुंचने से जुड़े सवालों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
इसके अलावा राष्ट्र और धर्म की सुरक्षा से जुड़े विषय भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे। आयोजन में रॉ के पूर्व निदेशक एमके सूजी सहित कई प्रमुख अतिथि शामिल होंगे। विभिन्न मुद्दों पर संवाद और प्रश्नोत्तर के विशेष सत्र भी आयोजित किए जाएंगे।
मूल लिंक: https://www.bhaskar.com/local/uttar-pradesh/varanasi/news/kashi-sanskriti-sansad-pm-modi-m
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