नॉन स्टॉप मेमू चलेगी, गोरखपुर से बनारस आने-जाने वालों को जल्द मिलेगी बड़ी सहूलियत
गोरखपुर, मुख्य संवाददाता। गोरखपुर से बनारस जाने वाले यात्रियों को जल्द ही बड़ी सहूलियत मिलने वाली है। पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल ने जोन मुख्यालय को बनारस सिटी से गोरखपुर तक नान स्टॉप मेमू चलाने का प्रस्ताव दिया है। वाराणसी मंडल के प्रस्ताव पर मुख्यालय विचार कर रहा है। मुख्यालय ने मंडल से इस रूट पर यात्रियों की संख्या, ट्रेनों की स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी हैं। नान स्टाप होने की वजह से मेमू गोरखपुर से बनारस तक महज साढ़े चार घंटे में पहुंच जाएगी।
वर्तमान में इस रूट पर छह ट्रेनें चल रही हैं। फिलहाल इस रूट पर कोई ऐसी ट्रेन नहीं है जो सुबह जाकर देर रात तक वापस आ सके। इसी को देखते हुए वाराणसी मंडल ने गोरखपुर से बनारस सिटी तक नान स्टॉप मेमू चलाने का प्रस्ताव दिया है। वर्तमान में सर्दर्न रेलवे (दक्षिण भारत) के गुंटूर में 190 किलोमीटर की दूरी के लिए नान स्टॉप मेमू चलती है। ये दूरी महज चार घंटे में पूरी हो जाती है।
1995 में चली थी पहली मेमू
मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टी यूनिट (मेमू) बिजली से चलने वाली मेन लाइन ट्रेन है। इसका परिचालन साल 1995 में शुरु हुआ था। ये सबसे पहले आसनसोल-आद्रा खंड पर और 22 जुलाई 1995 को खड़गपुर-टाटा खंड के बीच दौड़ी थी।
बाराबंकी से लखनऊ के बीच अब नहीं अटकेंगी ट्रेनें
वहीं, बाराबंकी से लखनऊ के बीच ट्रेनों को आउटर पर रोकने की समस्या से निजात दिलाने के लिए रेलवे ने कदम बढ़ाया है। मल्हौर से दिलकुशा केबिन तक तीसरी रेल लाइन बिछाने की योजना को रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिल गई है। करीब आठ किलोमीटर लंबी इस लाइन के निर्माण पर 160 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके बनने से बाराबंकी की तरफ से आने वाली ट्रेनों को लखनऊ पहुंचने के लिए लाइन खाली होने का इंतजार कम करना पड़ेगा।
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मोबाइल रिचार्ज जीतने का मौका!रोजाना 120 से अधिक ट्रेनों की आवाजाही का दबाव
लखनऊ-बाराबंकी रेलखंड पर प्रतिदिन करीब 57 से 62 ट्रेनें एक दिशा में चलती हैं। इतनी ही ट्रेनें दूसरी दिशा में भी संचालित होती हैं। यानी इस रेलखंड पर दोनों दिशाओं में रोजाना लगभग 114 से 124 ट्रेनों की आवाजाही रहती है। इनमें अयोध्या, वाराणसी, गोंडा और गोरखपुर की तरफ जाने वाली ट्रेनें शामिल हैं। रेलवे के अनुसार सुबह छह से आठ बजे और रात आठ से 11 बजे के बीच इस रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव सबसे अधिक रहता है। इन व्यस्त समयों में करीब दो दर्जन से अधिक ट्रेनों को दिलकुशा केबिन और मल्हौर के बीच रोकना पड़ता है। हालांकि, प्रत्येक ट्रेन के रुकने की अवधि अलग-अलग होती है। ट्रैक खाली न रहने से कभी-कभी मल्हौर से दिलकुशा केबिन तक आठ किमी दूरी तय करने में ट्रेनों को 15 से 20 मिनट तक लग जाता है। कुछ ट्रेनें तो दिलकुशा केबिन के से पहले पहुंच कर ट्रैक खाली होने के इंतजार में काफी समय तक खड़ी रहती हैं। तीसरी लाइन बनने से ट्रेनों को आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होगा और आउटर पर प्रतीक्षा कम हो जाएगी।
फरवरी तक तीसरी और चौथी लाइन बिछाने का लक्ष्य
बाराबंकी से मल्हौर तक तीसरी और चौथी लाइन बिछाने का काम भी फरवरी तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस काम के पूरा होने से बाराबंकी से लखनऊ की ओर आने वाली ट्रेनों के लिए अतिरिक्त रेलमार्ग उपलब्ध होगा। मल्हौर-दिलकुशा खंड पर तीसरी लाइन की योजना इस कड़ी को आगे बढ़ाएगी। दोनों ही ट्रैक का कार्य पूरा होते ही बाराबंकी से चारबाग या फिर ऐशबाग जंक्शन तक पहुंचने में ट्रेनों का ज्यादा समय नहीं लगेगा। मौजूदा समय में बाराबंकी से लखनऊ तक की दूरी तय करने में कंजेशन के कारण ट्रेनों को एक से सवा घंटे तक लग जाते हैं।
मूल लिंक: https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/non-stop-memu-will-run-people-travelling-from-
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