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शरद पूर्णिमा: 16 कलाओं से पूर्ण चंद्रमा ने की अमृतवर्षा, आकाशदीपों से जगमगाए काशी के घाट

शरद पूर्णिमा: 16 कलाओं से पूर्ण चंद्रमा ने की अमृतवर्षा, आकाशदीपों से जगमगाए काशी के घाट
तस्वीर: Amar Ujala

शरद पूर्णिमा पर रविवार को काशी के घाट, मंदिर और मठ आकाशदीपों से जगमगा उठे। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर मां महालक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्रमा की पूजा की। खुले आसमान के नीचे खीर रखकर चंद्रमा की रोशनी में प्रसाद तैयार किया गया। बिंदु माधव मंदिर, गौरी केदारेश्वर महादेव मंदिर, गायत्री मंदिर और त्रिदेव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन हुए।
 

शरद पूर्णिमा पर आरती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शरद पूर्णिमा पर वाराणसी में रविवार को 16 कलाओं से पूर्ण चंद्रमा की चांदनी में काशी के घाट, मठ, मंदिर और घर आकाशदीपों से जगमगा उठे। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर मां महालक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्रमा की विधि-विधान से पूजा की। सर्वार्थसिद्धि सहित छह महायोग में लोगों ने स्नान-दान के बाद चंद्रोदय पर पूजन किया।



श्रद्धालुओं ने गाय के दूध से बनी खीर खुले आसमान के नीचे रखी। इसे सोमवार को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाएगा। मान्यता है कि चंद्रमा की किरणों से खीर में औषधीय गुण आते हैं। वहीं, देव दीपावली तक जलने वाले आकाशदीप भी प्रज्ज्वलित किए गए।



बिंदु माधव मंदिर में खीर का भोग


पंचगंगा घाट स्थित बिंदु माधव मंदिर में भगवान को खीर का भोग लगाया गया। श्रद्धालुओं ने सुंदरकांड का पाठ किया। मंदिर के महंत मुरलीधर पटबर्धन ने बताया कि रात में खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखा गया। सोमवार को इसे भक्तों में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा। इसके साथ ही बिंदुमाधव अन्नक्षेत्र में एक माह तक भंडारे की शुरुआत की गई।

स्रोत: यह सामग्री Amar Ujala द्वारा प्रकाशित की गई थी — पूरा श्रेय मूल प्रकाशक का है।
मूल लिंक: https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/varanasi/sharad-purnima-the-moon-complete-in-all-i
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