Varanasi News: रोपवे का सफर
Varanasi News: वाराणसी में कैंट से रथयात्रा के बीच रोपवे की ट्रायल यात्रा ने काशी को ऊंचाई से देखने का रोमांचक अनुभव दिया। करीब ढाई किलोमीटर का सफर दस मिनट में पूरा हुआ। गंडोला अधिकतम 152 फीट की ऊंचाई पर चलेगा। कैंट से गोदौलिया का किराया 50 रुपये और न्यूनतम किराया 20 रुपये तय है। टिकट काउंटर, वेंडिंग मशीन और क्यूआर कोड से लिए जा सकेंगे।
Varanasi News: वाचस्पति उपाध्याय वाराणसी। गुरु, कभी बब्बा बताए रहे कि पहली दफा सड़कों पर फटफटहिया (बाइक) दौड़ी, मोटर-कार का हार्न सुनाई दिया तो गजब का अजूबा लगा था। तब टमटम, बग्घी का जमाना रहा। कद्दावर घोड़े रईसों की शान में चार चांद लगाते थे। उस वक्त मोटर कार तकनीक का चमत्कार लगी थी। अब ई हिंडोलवा, अरे नाहीं गंडोलवा तो अजीबे एहसास कराएगा। एतना ऊप्पर से शहर को देखने का अलग ही मजा आवेगा’-शायद यही या इसके इर्दगिर्द होगी एक आम बनारसी की प्रतिक्रिया जब नए साल के पहले दिन रोपवे की सवारी करने के बाद काशी विद्यापीठ, रथयात्रा या गोदौलिया स्टेशन पर पैर रखेगा। शुक्रवार को मीडिया टीम ने कैंट से रथयात्रा के बीच रोपवे की ट्रायल जर्नी की है।
काशी में रोपवे की रोमांचक सवारी
मोटर-कार और फटफटहिया (बाइक) से अब तक काशी ने 20वीं शती से होते हुए 21वीं शती के चौथाई कालखंड का सफर पूरा कर लिया है। तकनीक ने कई रूपों में दिव्य काशी को भव्य बनाया है मगर यह तारों का सफर तो सबसे अलहदा है, रोमांचकारी और कभी न भूलने वाला। अविस्मरणीय इसलिए कि जब दैनिक सफर शुरू हो जाएगा रोपवे से तो लोग इसके गुन गाएंगे, साथ में ‘गुरु, ई कमी रह गयल...’ की कसक भी जाहिर होगी मगर इससे किसी को असहमति नहीं होगी कि यह है तो रोमांच का गंडोला, तकनीकी इंतजामों के नट-बोल्ट से कसा हुआ। इस पर सवार होने के बाद मन की पहली जिज्ञासा रही कि अपना बनारस, अपनी काशी दिखती कैसी है! सच कहें, कैंट पर बैठे और लगभग डेढ़ सौ फीट की ऊंचाई से काशी विद्यापीठ को लांघते हुए रथयात्रा कब पहुंच गए, पता नहीं चला। मन मांगे मोर... की मन:स्थिति हावी हो गई। वैसे ही जैसे चार-पांच घंटे की घिसाई-पिसाई के बाद भी ‘मजा नाहीं आयल, तनी अऊर मिले के चाहत रहल’ की अतृप्ति सिल-बट्टे पर ‘विजया’ के अवशेष के रूप में चिपकी रह जाती है। इस गंडोला में रोमांच का तरन्नुम पैदा करने की ताकत है, उसकी तासीर सुकून देती है। गौरवबोध जगाती है कि अब से एक-दो माह बाद काशी देश में अर्बन ट्रांसपोर्ट में हुए पहले नवाचार की उपलब्धि का बखान करेगी, रैंकिंग के जिस तीसरे वैश्विक पायदान की ओर देश की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है, वहां पहुंच कर काशी आत्मविश्वास से भरी उद्घोषणा करेगी कि आपका भी यहां पहुंचना कठिन नहीं है। इस रास्ते पर ब्राजील और बोलिविया हमसे आगे हैं।
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मोबाइल रिचार्ज जीतने का मौका!दस मिनट में कैंट से रथयात्रा का सफर
फिलहाल, 10 मिनट के सफर में बहुत कुछ दिखता है। सतरंगी इमारतें, सड़कों पर भागती ट्रैफिक और चींटी की तरह बौना जाम। काशी के इस हिस्से का कोना-कोना बोलता और कानों में गुनगुनाता लगता है कि हम जमाने से कदमताल को दृढ़संकल्पित हो जाएं तो कुछ भी असंभव नहीं। हम तो बहक गए, यह बताना ही भूल गए कि कैंट के रोपवे स्टेशन पर पहुंचते ही नई दिल्ली या मुंबई, कोलकाता के मेट्रो स्टेशन का आभास होता है। बादलों की मेहरबानी, तीन बजकर आठ मिनट पर कैंट से गंडोला चलता है, तभी सतरंगी रोशनी नीचे अपनी चादर फैलाती दिखी। आसमान से गिरती फुहारों के बीच मौसम खराब होने की चिंता तो मौका देख बीच रास्ते ही कहीं कूद पड़ी थी। हमें चार मिनट लगे काशी विद्यापीठ स्टेशन पहुंचने में और वहां से छह मिनट में रथयात्रा पहुंच गए। लगभग ढाई किमी का यह सफर दिव्य काशी के भव्य बनने की राह का एक पड़ाव है जिसके आगे भी दूरी तय करनी है। एनएचएलएमएल की प्रोजेक्ट निदेशक पूजा मिश्रा यह बताना नहीं भूलतीं कि रोप-वे में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा इंतजामों की कई चरणों में जांच के बाद ही इसका संचालन शुरू किया गया है।
सड़क मार्ग और रोपवे की सुविधा
बहरहाल, सड़क मार्ग से इतनी ही दूरी तय करने में 15-20 मिनट का समय लग जाता है। यदि दिन में कैंट स्टेशन से कम वजनी बैग लेकर भी आप सड़क पार करें तो ऑटो पर बैठने से लेकर रथयात्रा चौराहे पहुंचने तक दो ट्रैफिक सिग्नल और भीड़ के कारण 10 मिनट में तो पहुंचना मुश्किल है। यदि कार पर हैं तो बजाते रहिए हार्न 15 से 20 मिनट तक।
टिकट और किराये की जानकारी
टिकट लेने की तीन व्यवस्था
कैंट रोप-वे स्टेशन परिसर में यात्रियों को तीन तरीके से टिकट लेने की सुविधा मिलेगी। नगद भुगतान कर ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल पर काउंटरों से टिकट लिया जा सकता है। टिकट वेंडिंग मशीन और क्यूआर कोड को स्कैन करके भी टिकट लेने का विकल्प रखा गया है।
सुरक्षा और यात्रियों के लिए सुविधाएं
चाइनीज मंझा रोप-वे के लिए भी चिंता
चाइनीज मंझा रोप-वे के लिए भी बड़ी चिंता है। कई बार रोप-वे के तारों के बीच में लगे ऑप्टिकल फाइबर को यह काट चुका है। अब तार पर लोहे की छोटी-छोटी रिंग लगाई गई है।
कैंट से गोदौलिया 50 रुपये में
रोप-वे से 50 रुपये में कैंट से गोदौलिया का सफर होगा। इसका न्यूनतम किराया 20 रुपये तय है। सुबह छह से रात दस बजे से इसका संचालन किया जाएगा। सावन, महाशिवररात्रि या अन्य बड़े अवसरों पर भीड़ बढ़ी तो संचालन का समय बढ़ा दिया जाएगा।
जानना जरूरी है
- 45 सेकंड में दूसरा चक्कर शुरू करने पहुंचेगा गंडोला
- अधिकतम ऊंचाई 152 फीट पर गंडोला का संचालन
- 06 मीटर प्रति सेकंड और 25 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगा
- 7 किलोग्राम तक वजनी बैग एक यात्री को नि:शुल्क लेकर जाने की सुविधा
- 20 प्रतिशत छूट मिलेगी टिकट में नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्डधारकों को
अन्य खासियत
- एक बार टिकट लेने पर चार घंटे तक स्टेशन परिसरों में समय बिताने की छूट
- बेबी केयर रूम की सुविधा मिलेगी महिला यात्रियों को
- ज्यादा भीड़ होने पर वेटिंग एरिया में इंतजार संभव
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
✦कैंट से गोदौलिया तक रोपवे का किराया कितना है?−
कैंट से गोदौलिया तक रोपवे का किराया 50 रुपये होगा। न्यूनतम किराया 20 रुपये तय है।
✦रोपवे से टिकट लेने के कौन-कौन से तरीके उपलब्ध होंगे?+
✦कैंट से रथयात्रा तक रोपवे का सफर कितने समय का है?+
मूल लिंक: https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/varanasi/story-varanasi-ropeway-trial-a-thrill
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