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BJP ने जीतीं 6 सीटें, फिर भी अखिलेश यादव क्यों मना रहे जश्न? काशी की डबल जीत का पूरा सियासी गणित समझिए

BJP ने जीतीं 6 सीटें, फिर भी अखिलेश यादव क्यों मना रहे जश्न? काशी की डबल जीत का पूरा सियासी गणित समझिए
तस्वीर: Prabhat Khabar

UP MLC Election Result: उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव नतीजों ने भाजपा और समाजवादी पार्टी, दोनों को अपनी-अपनी राजनीति का हिसाब लगाने का मौका दिया है. भाजपा ने छह सीटों पर जीत दर्ज कर अपना पिछला आंकड़ा बरकरार रखा. वहीं, सपा ने पांच सीटें जीतकर अपना प्रदर्शन बेहतर किया. इन नतीजों में सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की हो रही है. यहां सपा ने शिक्षक और स्नातक, दोनों सीटों पर जीत दर्ज की. स्नातक सीट की मतगणना करीब 55 घंटे तक चली. इसके बाद आए नतीजे ने सपा के उत्साह को और बढ़ा दिया. अब सवाल है कि जब भाजपा ने कुल 11 में से छह सीटें जीती हैं, तो सपा इतनी उत्साहित क्यों है? इसके पीछे वाराणसी की दोहरी जीत, लखनऊ की स्नातक सीट पर मिली सफलता और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बने राजनीतिक संदेश को समझना होगा.

11 सीटों पर किसका कितना रहा प्रदर्शन?

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था. 27 अक्टूबर की सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई. शुरुआती नतीजों में भाजपा ने बढ़त बनाई. सपा ने भी कई सीटों पर मुकाबला जारी रखा. अंतिम नतीजों में भाजपा ने छह और सपा ने पांच सीटें जीतीं. भाजपा ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की छह में से चार सीटों पर जीत दर्ज की. सपा को दो शिक्षक सीटें मिलीं. स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा ने दो और सपा ने तीन सीटें जीतीं. कुल सीटों के लिहाज से भाजपा आगे रही. लेकिन सपा ने 2020 के चुनाव में मिली तीन सीटों की संख्या बढ़ाकर पांच कर ली. पार्टी के लिए यह चुनावी उपलब्धि रही.

काशी की दोनों सीटों पर सपा की जीत क्यों है खास?

वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है. इसलिए यहां का चुनावी परिणाम राजनीतिक रूप से खास माना जा रहा है. इस बार सपा ने वाराणसी की शिक्षक और स्नातक, दोनों सीटों पर जीत दर्ज की. वाराणसी शिक्षक सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव ने जीत हासिल की. वहीं, स्नातक सीट पर सपा के आशुतोष सिन्हा ने भाजपा के केदारनाथ सिंह को हराया. इस सीट पर मतगणना लंबी चली. दोनों दलों के समर्थक मतगणना केंद्र के बाहर डटे रहे. भाजपा उम्मीदवार ने मतगणना को लेकर सवाल भी उठाए. बाद में केदारनाथ सिंह ने हार स्वीकार कर ली. सपा के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और संगठन की नजर वाराणसी पर रहती है. यहां दोनों सीटें जीतकर अखिलेश यादव को भाजपा के खिलाफ राजनीतिक संदेश देने का मौका मिला है. पार्टी इसे अपनी जमीन मजबूत होने के संकेत के रूप में पेश कर रही है.

वाराणसी में योगी सरकार के चार मंत्री, फिर भी भाजपा क्यों हारी?

वाराणसी से योगी सरकार में चार मंत्री जुड़े हैं. इनमें अनिल राजभर, रवींद्र जायसवाल, दयाशंकर मिश्रा और हंसराज विश्वकर्मा शामिल हैं. इसके बावजूद भाजपा दोनों सीटों पर जीत हासिल नहीं कर सकी. इस हार की एक संभावित वजह स्थानीय संगठन की सक्रियता और उम्मीदवारों का मतदाताओं से संपर्क भी हो सकता है. चुनावी चर्चा में यह बात सामने आई कि सपा उम्मीदवार लगातार मतदाताओं के बीच सक्रिय रहे. उन्होंने घर-घर जाकर संपर्क किया. दूसरी ओर, भाजपा के उम्मीदवारों के प्रचार और स्थानीय मतदाताओं तक पहुंच को लेकर सवाल उठे. शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होते हैं. यहां मतदाताओं का दायरा सीमित और विशेष होता है. ऐसे में उम्मीदवार का व्यक्तिगत संपर्क, स्थानीय मुद्दों की समझ और लगातार जनसंपर्क अहम भूमिका निभाते हैं. केवल बड़े नेताओं की मौजूदगी से जीत सुनिश्चित नहीं होती. हालांकि, भाजपा की हार की वजह सिर्फ स्थानीय नेताओं की कम सक्रियता थी, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी. इसके लिए संगठन की समीक्षा और चुनावी आंकड़ों का विश्लेषण जरूरी है.

क्या भाजपा के कार्यकर्ताओं का ओवरकॉन्फिडेंस पड़ा भारी?

चुनाव में भाजपा की कुल छह सीटों पर जीत हुई. लेकिन वाराणसी और लखनऊ जैसे क्षेत्रों में सपा की सफलता ने पार्टी के सामने आत्ममंथन का सवाल खड़ा किया है. एक राजनीतिक विश्लेषण यह भी है कि भाजपा के कुछ स्थानीय नेता और कार्यकर्ता अपनी जीत को लेकर जरूरत से ज्यादा आश्वस्त थे. उन्हें लगा कि पार्टी का मजबूत संगठन और सरकार की लोकप्रियता उम्मीदवारों को जीत दिला देगी. इसके उलट, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं को चुनाव में सक्रिय रखा. सपा की रणनीति का एक हिस्सा स्थानीय मतदाताओं से लगातार संपर्क बनाए रखना था. शिक्षक और स्नातक मतदाता अपने पेशे से जुड़े मुद्दों को भी महत्व देते हैं. ऐसे में उनके बीच पहुंच बनाना निर्णायक साबित हो सकता है.

काशी की जीत पर अखिलेश यादव ने क्या कहा?

वाराणसी की दोनों सीटों पर जीत के बाद अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधा. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि भाजपा वाराणसी में पहले मतगणना और फिर दोबारा मतगणना में भी हार गई. उन्होंने इसे 'डबल इंजन की डबल हार' बताया. अखिलेश यादव ने इन नतीजों को 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए कहा कि विधान परिषद चुनाव ने आगामी चुनाव की प्रस्तावना लिख दी है. उन्होंने भाजपा की शिक्षा नीतियों पर भी सवाल उठाए. उनके मुताबिक, पढ़े-लिखे बेरोजगार स्नातकों ने भी अपना फैसला सुना दिया है. यह अखिलेश यादव और सपा की राजनीतिक व्याख्या है. विधान परिषद चुनाव के नतीजे अपने आप में विधानसभा चुनाव का परिणाम तय नहीं करते. लेकिन इनसे पार्टियों को अपने संगठन और मतदाता आधार का आकलन करने का मौका जरूर मिलता है.

भाजपा ने हार के बाद क्या कहा?

उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में मतदान प्रतिशत बढ़ा है. जिन सीटों पर पार्टी को हार मिली है, वहां आत्ममंथन किया जाएगा. भाजपा के लिए राहत की बात यह है कि उसने छह सीटें जीतकर अपना पिछला आंकड़ा बरकरार रखा. वहीं, सपा ने तीन से पांच सीटों तक का सफर तय किया. इस लिहाज से दोनों दलों के लिए नतीजों के मायने अलग-अलग हैं.

किसे मिला फायदा और किसे लगा झटका?

सीटों की कुल संख्या देखें तो भाजपा छह सीटों के साथ आगे रही. उसने अपना पिछला प्रदर्शन बरकरार रखा. लेकिन वाराणसी की दोनों सीटों पर हार और लखनऊ स्नातक सीट गंवाना उसके लिए चुनौती है. दूसरी ओर, सपा ने पांच सीटें जीतकर विधान परिषद में अपनी संख्या बढ़ाई. वाराणसी की दोहरी जीत ने पार्टी को राजनीतिक संदेश देने का अवसर दिया. लखनऊ स्नातक सीट पर भी सपा ने भाजपा से सीट छीन ली. इसलिए इन नतीजों को केवल भाजपा की जीत या सपा की हार के रूप में नहीं देखा जा सकता. भाजपा ने कुल सीटों में बढ़त कायम रखी, जबकि सपा ने अपनी सीटें बढ़ाईं और प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में दोनों सीटें जीतकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराई. अब दोनों दलों के लिए असली चुनौती 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इन नतीजों से सबक लेने की होगी.

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स्रोत: यह सामग्री Prabhat Khabar द्वारा प्रकाशित की गई थी — पूरा श्रेय मूल प्रकाशक का है।
मूल लिंक: https://www.prabhatkhabar.com/state/uttar-pradesh/up-mlc-election-result-explained-bjp-sp-
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