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काशी में एयर शो से आमजन को जुड़ाव, रक्षा में आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

काशी में एयर शो से आमजन को जुड़ाव, रक्षा में आत्मनिर्भरता की नई मिसाल
तस्वीर: Jagran

जागरण संवाददाता, वाराणसी। दैनिक जागरण की सोमवारीय बैठक में बीएचयू के प्रोफेसर टीपी सिंह ने काशी में आयोजित एयर शो और देश की रक्षा तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि एयर शो सिर्फ विमानों का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि आम जनता को रक्षा प्रौद्योगिकी से जोड़ने और भारतीय संस्कृति को विश्व मंच पर प्रस्तुत करने का सफल प्रयास था।

गंगा के दोनों किनारों पर लाखों लोगों ने पहली बार सुखाेई, राफेल, तेजस, जैगुआर, मिराज और ध्रुव हेलीकॉप्टर को नजदीक से देखा। आसमान में डमरू, शिव और अन्य सांस्कृतिक आकृतियां बनाई गईं, जिससे यह आयोजन मात्र सैन्य प्रदर्शन न रहकर सांस्कृतिक संदेश का माध्यम भी बन गया।

प्रो. सिंह ने कहा कि काशी को विश्व की सबसे प्राचीन नगरी के रूप में स्थापित करने का विजन प्रधानमंत्री का था। दमिश्क और जेरूसलम भी प्राचीनता का दावा करते हैं, लेकिन मार्क ट्वेन के शब्दों में काशी की परंपरा, इतिहास और किंवदंतियां उनसे भी पुरानी हैं। एयर शो के माध्यम से आम नागरिकों को यह अहसास कराना था कि देश की रक्षा तैयारी कितनी मजबूत है।

प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने इस आयोजन को और महत्व दिया। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर बोलते हुए प्रो. सिंह ने बताया कि भारत लंबे समय तक विश्व का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक रहा। सऊदी अरबिया के बाद सबसे अधिक आर्म्स इम्पोर्ट भारत ही करता था। विश्व के कुल आर्म्स ट्रेड का करीब दस प्रतिशत हिस्सा भारत में आता था। अब स्थिति बदल रही है।

स्रोत: यह सामग्री Jagran द्वारा प्रकाशित की गई थी — पूरा श्रेय मूल प्रकाशक का है।
मूल लिंक: https://www.jagran.com/uttar-pradesh/varanasi-city-air-show-in-kashi-fosters-public-engage
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